Select best ELSS, Tax Saver Mutual Funds in 1 Minute

This video is for those investors and also for common people who don’t know much about taxation but want to save tax and earn profit at the same time. Equity Linked Saving Scheme offers both. The funds mentioned in this video have performed well in the previous decade. Mirae Asset fund is launched in Dec 2015 so I mentioned returns generated by it in past 5 years. If you are looking for a long-term tax saving option, I am sure this video will help you in one minute to find the best possible funds in this sector with a multi-cap distribution methodology of investment in it.

Select Best Small Cap Mutual Funds in 1 Minute

In this video, I provided very precise information about the best small-cap mutual funds that yielded high returns in the past few years. Small-Cap funds may be risky investments for short-term investors but can deliver very high returns in long run. For this video, I thoroughly studied all small-cap funds and chosen a few best in the category. I hope you will earn great profits in long run by investing in these funds.

म्यूच्यूअल फण्ड सही या नहीं ?

” म्यूच्यूअल फण्ड सही नहीं है ” कोरोना संकट से जूझ रहे भारत देश में आजकल सोशल मीडिया पर आपने यह नारा अकसर देखा होगा। इस नारे के साथ निवेशकों को प्रॉपर्टी (Real Estate) में निवेश हेतु प्रेरित किया जा रहा है। मैं यह दावे से कह सकता हूँ कि, अगर आपने भी इस तरह का प्रचार देखा है तो आपको भी लगा होगा की बात तो सही है, म्यूच्यूअल फण्ड (Mutual Fund) है तो शेयर बाज़ार में निवेश का ही एक रूप और शेयर बाज़ार (Stock Market) का क्या भरोसा ?

क्या आपकी भी यही धारणा ? अधिकतर भारतीय निवेशक बाज़ार में जोख़िम उठाने से बचते है। भारतीय निवेशक अधिकतर सावधि जमा योजना (Fixed Deposit), आवर्ती जमा योजना (Recurring Deposit), भारतीय जीवन बीमा द्वारा संचालित किसी योजना, भारतीय डाक (Indian Post) की योजनाओं में निवेश करना पसंद करते है और शेयर बाज़ार की तुलना में इन विकल्पों को कई अधिक सुरक्षित मानते है।

एक साधारण निवेशक यह भूल जाता है कि, जो पूँजी (Capital) वह बैंक में जमा कर रहा है वह बैंक कमाने हेतु किसी को कर्ज के रूप में दी जा सकती है या सरकार की किसी वृहद परियोजना में निवेश की जा सकती है या फिर बैंक इसे किसी राजहुंडी (Treasury Bill) में निवेश कर सकते है या फिर बैंक भी इसे शेयर बाजार में प्रत्यक्ष या अप्रयत्क्ष रूप में निवेश कर सकता है आदि। ऐसी स्तिथि में मान लीजिये अगर बैंक को निवेश का मूल्य नहीं मिला तो आपकी पूँजी की स्तिथि क्या होगी ?यस बैंक (Yes Bank) इसका सबसे ताज़ा उदाहरण है।

सबसे सुरक्षित माने जाने विकल्प के बाद, बात करते है जंगम सम्पति (Immovable Property) में निवेश की, इस क्षेत्र में सन 1992 के बाद एक देखी गयी। उदारीकरण नीति के लागु होने के बाद शहरों का स्वरुप तेज़ी बदलने लगा और देश में विदेशी निवेश (Foreign Investment) और बहुराष्ट्रीय संस्थाओं (Multi National Companies) की बाढ़ से आ गयी साथ ही साथ भारतीय निजी क्षेत्र को विदेश पूँजी निवेश (Foreign Direct Investment) का बहुत लाभ हुआ। आईसीआईसीआई बैंक (ICICI Bank) और एचडीएफसी बैंक (HDFC Bank) के मुनाफे वृद्धि इसका सर्वश्रेष्ठ उदाहरण है।

इस दौर में जंगम सम्पत्तियों के भाव आसमान छूने लगे और प्रापर्टी व्यवसाय पंक्तिबद्ध मकानों (Row House), बहुमंजिला इमारतों , फार्म हाउस व्यवसाय, उपनगर परियोजनाओं (Township Schemes) के माध्यम से खूब मुनाफा कमाने लगा। भारत के रियल एस्टेट उद्योग में वर्ष 2012 – 2013 के मध्य सर्वाधिक तेजी दर्ज की गयी थी जो लगभग 17.5 के आसपास थी और उसके यह दर लगातार गिरती चली गयी। सन 2016 में यह तेज़ी -2.06 तक नीचे गिर गयी थी। वर्तमान परिदृश्य की बात की जाए यह दर लगभग 1.5 प्रतिशत की है। अगर विभिन्न सूचकांक या रियल स्टेट में मूल्य वृद्धि पर नज़र रखने वालों की माने तो 2011 में आपके द्वारा निवेश किया गया 100 रुपया आज सन 2020 में 225 रुपये के बराबर है।

अब बात करते है महंगाई कि, साधारण उदाहरण है कि, सन 2010 में दिल्ली में पेट्रोल की कीमत ₹51.53 और 24 जून 2020 को दिल्ली में पेट्रोल का भाव है ₹ 79.53 अर्थात कीमतों में 154 प्रतिशत की वृद्धि। लाज़मी है की अगर ईंधन के मूल्य में वृद्धि होगी तो अन्य उत्पादों के मूल्य में वृद्धि होना सामान्य है, ऐसे में प्रॉपर्टी या रियल स्टेट में निवेश से प्राप्त आय का क्या मूल्य रह जाता है, यह सबसे बड़ा प्रश्न है।

साथ ही साथ रियल स्टेट उद्योग में तरलता (Liquidity) का आभाव इसके मूल्य में गिरावट का प्रमुख कारण है। अगर आप आपातलकाल की स्तिथि में अपनी संपत्ति बेचने जायेंगे तो सबसे पहले खरीदार ढूंढना मुश्किल, खरीदार मिल जाये तो उचित बाज़ार भाव मिलना मुश्किल साथ की साथ वैध मूल्य वैध रूप से मिलना मुश्किल आदि समस्याएं इस निवेश को वास्तव में जंगम बना देती है।

अब बात करते है म्यूच्यूअल फण्ड में निवेश की, आपने किसी कर में छूट (Tax Saver) प्रदान करने वाले फण्ड में निवेश किया है, उदाहरण तौर पर आपने आदित्य बिरला सनलाइफ टैक्स रिलीफ, 96 (ABSL Tax Relief, 96) में 100 रूपये निवेश किया होता तो इसका मूल्य लगभग 264 रुपये होता, साथ ही साथ आपको कर में भी छूट मिलती।

Source : Value Research

म्यूच्यूअल फण्ड आपको तरलता (Liquidity) प्रदान करता है परन्तु अगर यह निवेश बाजार आधारित फण्ड में है और आपने अभी अभी SIP प्रारम्भ की है तो आपके निवेश का मूल्य आधा भी हो सकता है। म्यूच्यूअल फण्ड में निवेश लम्बी अवधि के लिए करना ही ठीक है। अगर आप छोटी अवधि के लिए या स्थायी मुनाफे के लिए निवेश कर रहे है तो, Liquid Fund या Debt Fund आपके लिए बेहतरीन विकल्प सिद्ध हो सकते है।

Source : Value Research

आप देख सकते है की, यह स्थायी मुनाफा है बाजार की उथल-पुथल का इस फण्ड पर कोई प्रभाव नहीं है। इसका फण्ड का मुनाफा प्रॉपर्टी में होने वाले मुनाफे से कम है परन्तु यह स्थायी है और मात्र 48 घंटे में आपका पैसा मुनाफे के साथ आपके खाते में होता है। Liquid Fund के मामले में 50,000 रुपये या 90 प्रतिशत जो भी कम हो तत्काल आपके खाते में ट्रांसफर हो जाते है।

अंत में तो यह निवेशक का ही विवेक तय करता है कि, निवेश का उचित विकल्प क्या है ?