बीमा : सामान्य परिचय और इतिहास

अगर आप किसी से पूछें कि, भाई क्या आपने बीमा करवा रखा है या क्या आपके पास कोई स्वास्थ्य बीमा (Health Insurance) है, तो मान कर चलिए की सामान्य व्यक्ति कहेगा नहीं या आपको 10 में से 9 लोग इस प्रश्न का उत्तर ना में ही देंगे। बहुत से लोगों ने जो शासकीय सेवा में कार्यरत है ने सिर्फ इसलिए बीमा करा रखा है कि, इस कारण आयकर (Income Tax ) में छूट मिलती है।

क्या आपके मन में यह विचार नहीं आता की बीमा की शुरुआत कैसे और कहाँ हुई होगी ? वह कौन सा ऐसा व्यक्ति होगा जिसके मन में बीमा करने का ख्याल आया होगा ? क्या इस बीमा प्रणाली का जन्म भारत (India) में हुआ है ? ऐसे बहुत से सामन्य और रोचक सवालों के जवाब आपको इस लेख में मिलेंगे।

बीमा या इन्शुरन्स (Insurance) शब्द से कौन परिचित नहीं है, पिछले दो दशक ने इस उद्योग को बदल कर रख दिया है। इस उद्योग की जड़ें 3000 ईसा पूर्व में बेबीलॉन फैली हुई है। यह माना जाता है कि, यहाँ के समुद्री व्यापारी जो साहूकारों से कर्ज लिया करते उस पर अधिक ब्याज़ दिया करते थे। यह अतिरिक्त धन इस बात को सुनिश्चित करता था कि, समुद्री यात्रा के दौरान जहाज़ डूब जाने पर, लूटेरों द्वारा जहाज़ लूट लिए जाने पर कर्ज लेने वाले को साहूकार को किसी भी राशि का भुगतान नहीं करना होगा।

भारत में गुजरात के व्यापारी भी इस युक्ति का सहारा लेकर श्रीलंका आदि देशों में व्यपार किया करते थे। यह तो हुई प्राचीन इतिहास की बात अब करते है, पिछली 4 शताब्दियों की, लंदन में 17 वीं सदी में लगी भीषण आग (Great Fire of Landon) ने आधुनिक बीमा जगत की नींव रखी और सन 1680 में फायर स्टेशन (Fire Station) नामक बीमा कंपनी की नींव रखी गयी। आपके मन में यह सवाल आ सकता है कि, फिर से ऐसी आग लग जाती तो क्या नई बीमा कंपनी नुकसान की भरपाई कैसे करती या फिर की बीमा ही क्यों, कोई और तरीका जैसे बॉन्ड या कोई गारंटी क्यों नहीं ?

इसका एक सबसे प्रमुख कारण यह है कि, बीमा दो पक्षों के हित को ध्यान में रख कर किया जाता है, यह दो पक्ष बीमित और बीमा प्रदाता है। बीमा कभी भी एक पक्षीय हित को साधने वाला नहीं होता। अगर बीमा अवधि में सम्बंधित बीमित परिसंपत्ति की हानि होती है तो बीमित को क्षतिपूर्ति प्रदान की जाती है और अगर कोई हानि नहीं होती तो बीमा प्रदाता प्रीमियम की राशि रख सकता है जो उसका मुनाफा है।

बीमा प्रदाता हमेशा किसी घटना के होने की सम्भावना की गणना के आधार पर बीमा प्रदान करता है और प्रीमियम (Premium) का मूल्य इस बात पर तय होता है कि, उस घटना के होने कितने आसार है। यह तो तय है कि, लन्दन में लगी भीषण आग के बाद वहां रहवासी आग के खतरों के पार्टी अधिक जागरूक हुए होंगे और साथ – साथ ऐसी घटना हो इस प्रयास में भी व्यक्तिगत रूप से कार्यरत रहे होंगे। सीधा अर्थ है कि, भविष्य में ऐसी घटना होने की संभावना काम हो जाती है, तो एक सामान्य सी राशि नागरिकों से लेकर, उन्हें सुरक्षा प्रदान की जा सकती है। यह तो हुई प्रीमियम की बात।

बीमा भी म्यूच्यूअल फण्ड (Mutual Fund) से मिलता जुलता ही है। म्यूच्यूअल फण्ड मुनाफा कमाने के इच्छुक व्यक्तियों के आंशिक निवेश से निर्मित एक फण्ड है जो इस राशि को मुनाफा सृजित करने वाली इकाइयों में निश्चित समयवधि के लिए किया जाता है। ठीक इस प्रकार बीमा प्रीमियम के माध्यम से एकत्र राशि का वह फण्ड है जो प्रीमियम प्रदाताओं को परिसंपत्ति के हानि होने पर क्षतिपूर्ति प्रदान करता है। इसे इस प्रकार भी कहा जा सकता है की बीमा कुछ लोगों के नुक्सान को में बाँट देता है या बहुत से लोग मिल कर कुछ लोगों को हुए नुकसान की भरपाई कर देते है।

भारत के परिपेक्ष्य में बात की जाए तो भारत में ओरिएण्टल इन्शुरन्स (Oriental Insurance) पहली जीवन बीमा करने वाली कंपनी थी जिसकी नींव 1818 में कलकत्ता में राखी गयी थी। इसके बाद 1850 में भारत की पहली सामन्य बीमा (General Insurance) कंपनी ट्रिनटन (Trinton) की नींव रखी गयी।

इसके बाद स्वदेशी कंपनी बॉम्बे म्यूच्यूअल अशुरन्स कंपनी (Bombay Mutual Assurance Company) की नींव सन 1870 में रखी गयी, इसके बाद सन 1906 में नेशनल इन्शुरन्स (National Insurance) कंपनी अस्तित्व में आयी। इसके बाद 1938 में बीमा सम्बन्धी नियमों को इम्पीरियल असेंबली (Imperial Assembly) कानूनी रूप देते हुए बीमा अधिनियम 1938 (Insurance Act, 1938) पारित किया गया। भारत की आज़ादी के बाद बीमा उद्योग का राष्ट्रीयकरण किया गया जिसके परिणाम स्वरुप 1 सितम्बर 1956 को भारतीय जीवन बीमा निगम (Life Insurance Corporation of India) की नींव पड़ी और इस संस्था ने सन 2000 तक भारतीय बीमा जगत पर एक छत्र राज किया।

यह कहना बिलकुल गलत न होगा की भारत के जनता में बीमा उद्योग पर जो विश्वास है वह एलआईसी के कारण ही है। भारत में वर्तमान में 24 जीवन बीमा कंपनियां कार्यरत है और 34 संस्थायें जनरल इन्शुरन्स में कार्यरत है। आशा है आपको यह लेख पसंद आया होगा। बीमा सम्बंधित किसी भी जानकारी के लिए

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